मुख्यमंत्री की सुरक्षा पर उठा सवाल..! मुख्यमंत्री की सुरक्षा से भी ऊपर है चीफ सेक्रेटरी ?

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नक्सलप्रभावित प्रदेश में ईमानदारी से ड्यूटी करने पर इंस्पेक्टर हुआ सस्पेंड.

छत्तीसगढ़ चीफ़ सेक्रेटरी से पहचान पत्र मांगना एक टीआई को कितना महंगा पड़ गया कि बदले में उसे अब निलंबन करते हुए लाइन अटैच कर दिया गया है।

कोरबा — यह मामला पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कोरबा जिले के प्रवास से जुड़ा हुआ है जब सीएम बघेल राज्य सरकार के सुराजी गाँव योजना के तहत नरवा,गरुवा,घुरवा,बाड़ी विकास के लिए नवनिर्मित आदर्श गौठान का शुभारंभ व अवलोकन करने “पाली” विकासखंड के ग्राम केराझरिया पहुँचे थे।
बस इतना कसूर था पीड़ित पुलिस इंस्पेक्टर का

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सभा के दौरान इंट्री गेट पर दर्री थानेदार रघुनंदन प्रसाद शर्मा की ड्यूटी लगाई गई थी।
प्रदेश के मुखिया की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वहां आने-जाने वाले हर अधिकारी और व्यक्ति के आई कार्ड(परिचय पत्र) की जांच निरीक्षक द्वारा की जा रही थी,जाँच के दौरान इंट्री गेट पर सूबे के मुख्य सचिव सुनील कुजूर भी पहुँचे। जहाँ निरीक्षक शर्मा उन्हें पहचान नहीं पाए व उनसे भी परिचय पत्र मांग लिया लेकिन मुख्य सचिव सुनील कुजूर ने जैसे ही अपना परिचय निरीक्षक को दिया। निरीक्षक शर्मा ने इस भूल के लिए उनसे तत्काल माफी भी मांग ली।

सीएस को खुश करने कर दिया निलंबित

परिचय पत्र की बात यही खत्म नहीं हुई। इससे क्षुब्ध मुख्य सचिव ने इसकी शिकायत आईजी से कर दी। जिसके बाद जिले के एसपी जितेंद्र मीणा ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले में कार्रवाई करते हुए निरीक्षक शर्मा को निलंबित कर लाइन हाजिर होने की सजा मिल गई है।

चीफ सेक्रेटरी ने भी नही लिया संज्ञान….

पूरे मामले को लेकर 24 घंटे के बाद यह घटना और उसपर पुलिस अधीक्षक की करवाई सोशल मीडिया, व्हाट्सअप पर वाइरल हो गई है, इसके बाबजूद, राज्य के मुख्य सचिव ने ईमानदारी से कर्तव्य पालन करने वाले इंस्पेक्टर को राहत पहुंचाने को लेकर अबतक कोई व्यक्तिगत पहल करने तक कि रुचि नही दिखाई है।

सवाल उठना लाजिमी है सीएम साहब….

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस मामले में फौरन संज्ञान में लेते हुए, पीड़ित पुलिस इंस्पेक्टर का निलंबन रद्द कर उसे मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी करने के लिए पुरस्कृत करने की मांग सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन करने लगे हैं।
आरटीआई एक्टविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने कहा कि प्रदेश नक्सल प्रभावित है, और कोरबा पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई को अमानवीय करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई एक जिम्मेदारी और पूरी ईमानदारी से ड्यूटी करने वाले पुलिस अधिकारी का मनोबल तोड़ने वाली है।

 

रिपोर्ट — कुमार संतोष सिंह

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