227 वीं बटालियन सीआरपीएफ (C.R.P.F.) के जवानों का हुआ आयुर्वेदिक प्रकृति परीक्षण

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लेदा, तोंगपाल (जिला सुकमा) – देश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने और हर घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए “देश का प्रकृति प्रशिक्षण अभियान” के तहत 227वीं बटालियन सीआरपीएफ (C.R.P.F.) के जवानों का प्रकृति परीक्षण आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला आयुष विभाग और सीआरपीएफ (C.R.P.F.) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
आयुष संचालनालय के निर्देशानुसार इस परीक्षण का उद्देश्य जवानों को उनके शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के बारे में जागरूक करना और उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य व जीवनशैली को आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर सुधारने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है। जवानों की प्रकृति परीक्षण प्रक्रिया में मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया गया, जिसके माध्यम से उनकी शारीरिक प्रकृति का आकलन किया गया। परीक्षण के बाद प्रत्येक जवान को एक प्रमाण-पत्र जारी किया गया, जिसमें उनकी प्रकृति के आधार पर स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी, उचित खानपान और जीवनशैली के लिए सुझाव (Do’s and Don’ts) दिए गए।
डॉ. विशाल मल्होत्रा और श्री संजीव सिंह (कमांडेंट) ने व्यक्त किए विचार:
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. विशाल मल्होत्रा (सी.एम.ओ.) सीआरपीएफ (C.R.P.F.) अस्पताल, तोंगपाल ने कहा, “आयुर्वेद हमारी प्राचीन परंपरा का आधार है और यह हमें व्यक्तिगत प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाने का ज्ञान प्रदान करता है। जवानों को यह समझना चाहिए कि उनकी शारीरिक प्रकृति के अनुसार खानपान और दिनचर्या अपनाना उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा और कार्यक्षमता बढ़ाएगा।”
इसी विषय पर श्री संजीव सिंह (कमांडेंट) द्वारा इस पर विशेष रूप से महत्व दिया गया कि छत्तीसगढ़ तथा बस्तर क्षेत्र प्राचीन काल से ही अपनी वन औषधियां और आयुर्वेद के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। हम सबको मिलकर आयुर्वेद को अपने जीवन में तथा आचरण में समाहित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों की उपस्थिति:
कार्यक्रम में श्री संजीव सिंह, कमांडेंट (ए.ओ.एल.), डॉ. विशाल मल्होत्रा (सी.एम.ओ.), श्री नवीन कुमार सिंह, द्वितीय कमान अधिकारी, श्री कमलेश कुमार साहू, सहायक कमांडेंट, डॉ. एस.डी. कवाट, जिला आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, और साथ ही वरिष्ठ अधिकारी तथा जवान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का महत्व:
जवानों को आयुर्वेद के त्रिदोष सिद्धांत पर आधारित स्वास्थ्य प्रबंधन के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने दैनिक जीवन में आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था। परीक्षण और प्रमाण-पत्र के माध्यम से जवानों को स्वास्थ्य सुधार के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन मिला।
यह पहल न केवल जवानों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रयास है, बल्कि आयुर्वेद को आम जनता तक पहुंचाने के लिए एक नई दिशा प्रदान करती है। अंत में सीआरपीएफ (C.R.P.F.) तथा आयुष विभाग ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वह इस क्षेत्र में आयुर्वेद से जुड़ी हुई जागरूकता को बढ़ाने में मदद करेंगे ताकि आम जनजीवन को यहां के प्राकृतिक परिवेश को देखते हुए स्वास्थ्य लाभ मिल सके और माननीय प्रधानमंत्री जी का संकल्प पूरा हो सके।

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