संत समाज द्वारा सनातन धर्म विरोधी कार्यों के विषय में लोगों को कर रहे है जागरूक ।

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रायपुर/ देश – प्रदेश में सनातन धर्म के नाम पर झूठी अपवाहें फैलाना, धर्म के नाम पर लोगों को फर्जी तरीके से बरगलाना , धर्म परिवर्तन करवाना यह मामला दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है । ऐसे में सनातन धर्म के संतों ने हिंदू धर्म की रक्षा और सनातनियों को एक जुट करने का बीड़ा उठाया है।

आज संत समाज के संतों ने प्रेस वार्ता के माध्यम से ऐसे ही एक मामले  पर पत्रकारों के साथ चर्चा के दौरान खुलासा करते हुए कहा कि रायपुर कुशालपुर निवासी अमन दत्त ठाकुर पिता विकास दत्त ठाकुर सनातन धर्म के नाम का ढोंग कर रहे हैं , वह धर्म विरोधी एवं अंधविश्वास फैलाने जैसी हरकते कर रहे है । साथ ही बताया कि यह व्यक्ति संत का वेश धारण कर मार्च 2024 में वृन्दावन स्थित मलूकपीठ से गुरु दीक्षा ली और इससे पहले पांच वर्षों तक प्रदेश की भोली भाली जनता को गुरु दीक्षा के नाम पर झूठा प्रचार कर रहा था । जबकि दीक्षा लेने के बाद संन्यास ग्रहण कर घर परिवार का त्याग कर ना पड़ता है । जनवरी 2025 महाकुंभ प्रयागराज में इन्हें मलूकपीठ द्वारा जगतगुरू एवं मठाधीश की उपाधि प्रदान कर दी गई । अब फर्जी तरीके से इनके द्वारा गौशाला चलाया जा रहा है , फर्जी तरीके से महाकुंभ में लाखों रुपए की चंदा भी उगाही की गई । यह पूरी जानकारी कई समाचार पत्र, सूचना का अधिकार और पुलिस विभाग धमतरी के द्वारा प्रकाश में आया ।

अब यह व्यक्ति अपने रायपुर निवास को छोड़कर वृन्दावन ओरछा की तरफ भाग चुका है । इन सभी बातों को लेकर संत समाज रायपुर द्वारा वृंदावन स्थित श्री मलूकपीठ के पीठाधीश्वर से भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया एवं शिकायत के साथ पीठाधीश्वर जी से इसके निष्काशन की मांग की गई। साथ ही साथ संतों द्वारा चेतावनी दी गई कि ऐसे छद्म्वेषधारी द्वारा साधु संत का चोला ओढ़ कर आम जनता को गुमराह तथा लूट रहें है यदि पीठ द्वारा इनके निष्काशन नहीं किया जायेगा तो संत समाज द्वारा संम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन करते हुये आम जनता को जागृत किया जायेगा कि श्री मलूकपीठ ने ऐसे फर्जी संत की पीठाधीश एवं जगतगुरू की उपाधि प्रदान कर जनता को लूटने की खुली छूट प्रदान की गई है।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ संत समुदाय द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी से मिल कर उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाये गये आपरेशन कालनेमि की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी फर्जी साधु संतों की धरपकड़ करने की मांग की गई थी. जिस पर मुख्यमंत्री जी द्वारा तत्काल कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था।

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