आयोग के निर्देश पर 17 माह की बच्ची को मिलेगा मां-बाप दोनो का प्यार।

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आयोग ने दो शासकीय सेवको के निलंबन की अनुशंसा की।

फाॅरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद- मृतका ने आत्महत्या नहीं किया था, हत्या का मामला बनेगा- आयोग

रायपुर/06 मई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य ओजस्वी मंडावी एवं दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 395 वी. एवं रायपुर जिले में 184 वी. जनसुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने अपनी बहन वह बहन की 6 वर्षीय पुत्री की हत्या की शिकायत की थी जिसमें आवेदिका की बहन व उसकी पुत्री पेड की डंगाल से रस्सी के माध्यम से आत्महत्या करना पुलिस के द्वारा बताया गया था जबकि दोनो के पांव जमीन पर थे। जिसमें आयोग द्वारा फाॅरेंसिक एक्सपर्ट से जांच कराये जाने का आदेश दिया था। आज की सुनवाई के दौरान आवेदिका द्वारा फाॅरेंसिक एक्सपर्ट डाॅ. सुनंदा द्वारा की गई जांच रिपोर्ट की सी.डी. आयोग मे प्रस्तुत की उक्त रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि दोनो मृतिकाओं की मृत्यु को जिसको आत्महत्या बताया गया था। वास्तव मे आत्महत्या नही है। वरन् हत्या का स्पष्ट मामला है। अनावेदकगणों द्वारा घटना स्थल की फोटो और साक्ष्य की जांच, फोटोग्राफ और विवेचना किया जाकर पूरे मामले को आत्महत्या बताकर मामला रफा दफा करने का प्रयास भी किया गया था। इन सभी अनावेदकगणों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज किये जाने की अनुशंसा आयोग द्वारा की जायेगी तथा इस पूरे मामले में सभी अनावेदकगणों को थाना प्रभारी के माध्यम से आयोग की सुनवाई में उपस्थिति हेतु पत्र प्रेषित किया जायेगा, ताकि प्रकरण का निराकरण यथाशीघ्र किया जा सके।
एक अन्य सुनवाई मे आवेदिका और अनावेदक पति-पत्नि है जो 02 वर्षो से अलग रह रहे थे। उनकी लगभग डेढ़ वर्ष की पुत्री है। आयोग द्वारा दोनो पक्षों की विस्तृत काउंसलिंग के पश्चात् अनावेदक(पति) ने आयोग के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि वह अपने कार्यस्थल आई.डी.एफ.सी बैंक दुर्ग मे कार्य करता है। वह आवेदिक और अपनी पुत्री के साथ दुर्ग मे ही रहना चाहता है। आयोग की समझाईश पर आवेदिका व अनावेदक साथ रहने तैयार हुए। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में पूर्व की सुनवाई में अनावेदक ने यह स्वीकार किया था कि आवेदिका से उसका तलाक नहीं हुआ है और उसने अनावेदिका क्र. 2 के साथ दूसरा विवाह कर लिया है। जिससे उसकी 1 बेटी है। दोनो अनावेदकगण शासकीय सेवा मे कार्यरत् है। इसके बावजूद सिविल सर्विसेस रूल्स का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से दूसरा विवाह किया है। आयोग द्वारा दोनो शासकीय सेवको के निलंबन हेतु पत्र संचालक स्वास्थ्य विभाग को महिला आयोग द्वारा अनुशंसा भेजी जायेगी।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को अनावेदकगणों से 5 एकड जमीन मिल चुकी है जिसपर खेती का काम अनावेदकगणों द्वारा किया जाता है ऋण पुस्तिका आवेदिका की बेटी के नाम पर है और उसे नियमित रूप से खेती का बिना खेती किये पैसा मिल जाता है। अनावेदक ने आवेदिका की बेटी के नाम पर 65 लाख का बीमा भी करा रखा है। प्रकरण जारी रखने का कोई औचित्य ना होने के कारण प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

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