प्रेस क्लब में गूंजा जस गीत, दिलीप षडंगी ने बांधा भक्ति का समां
‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में पहुंचे जस गीत सम्राट दिलीप षडंगी, छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने की अपील
रायपुर। नवरात्रि के पावन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम भक्तिमय संगीत से सराबोर हो गया। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जस गीत गायक एवं जस गीत सम्राट दिलीप षडंगी ने प्रेस क्लब पहुंचकर अपने सुमधुर जस गीतों से ऐसा समां बांधा कि पूरा माहौल माता की भक्ति में डूब गया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से आत्मीय चर्चा करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला-संस्कृति, जस गीतों की परंपरा, अपने संगीत सफर और लोक कलाकारों के संरक्षण एवं प्रोत्साहन पर विचार साझा किए।
संगीत की साधना से माता की भक्ति तक का सफर
दिलीप षडंगी ने अपने संगीत सफर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि संगीत की सेवा करते-करते उनका जुड़ाव स्वाभाविक रूप से माता की भक्ति की ओर बढ़ता चला गया। इसी दौरान उनके मन में माता की आराधना से जुड़े विचार और गीत सहज रूप से आने लगे। जब उन्होंने इन गीतों को अपनी आवाज दी, तो लोगों ने उन्हें खूब पसंद किया और जस गीतों के माध्यम से उन्हें व्यापक पहचान एवं प्रसिद्धि मिली। माता की भक्ति और संगीत के इस संगम ने उन्हें छत्तीसगढ़ के ख्यातिनाम कलाकारों में विशिष्ट पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जस गीतों में माता की भक्ति की अद्भुत शक्ति है। इन गीतों को सुनकर श्रद्धालु भक्ति में झूमने लगते हैं। यह प्रभाव केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के बाहर आयोजित प्रस्तुतियों में भी जस गीतों ने लोगों को भावविभोर किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और संगीत की अपनी विशिष्ट पहचान है, जिसे और व्यापक स्तर पर पहुंचाने की जरूरत है।
स्थानीय कलाकारों को मिले अधिक अवसर
दिलीप षडंगी ने चिंता जताई कि छत्तीसगढ़ में भक्ति संगीत और लोक गायन के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली कलाकार मौजूद हैं, लेकिन कई बार चकाचौंध के आकर्षण में स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा कर बाहरी कलाकारों पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने आयोजकों और आम लोगों से अपील की कि छत्तीसगढ़ी संगीत, संस्कृति और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय कलाकारों को अधिकाधिक अवसर दें।
उन्होंने सरकार से भी लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देने, उनकी आर्थिक सहायता की व्यवस्था को बेहतर बनाने और समय पर सहयोग उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कलाकारों को उचित मंच और सम्मान मिलने से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और अधिक समृद्ध होगी।
जस गीतों की प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के आग्रह पर दिलीप षडंगी ने ‘आमा पान के पतरी, करेला पान के दोना’ और ‘कोरी-कोरी नारियल चढ़े’ जैसे लोकप्रिय जस गीतों की प्रस्तुति दी। उनके गीतों ने उपस्थित पत्रकारों को मंत्रमुग्ध कर दिया और प्रेस क्लब का वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यादव तथा संयुक्त सचिव निवेदिता साहू और भूपेश जांगड़े सहित अन्य पत्रकार उपस्थित रहे। ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में लोक कला, संस्कृति और भक्ति संगीत के इस अनूठे संगम ने नवरात्रि के उल्लास को और खास बना दिया।
